भारतीय मुसलमानों द्वारा बनाई गयी ये इमारते अमर है, कोई भी देश इनकी नक़ल नहीं कर सका

भारत में आज भी कई ऐसी इमारते और स्मारक मौजूद है जो की भारत के गौरवशाल गौरवशाली इतिहास की कहानी बया करती है भारत की कुछ इमारते ऐसी है जिन्हें दुनियां के कुछ देशो में दोबारा बनाने की कोशिश की गई लेकिन व्हे सफल नहीं हो पाये।

ये इमारतें भारत के गौरबशाली इतिहास की कहानी बयां करती है..!

( 1 ) लाल किला : लाल किला प्रसिद्ध किले ”ए” मोअल्ला का नया नाम है जो शाहजानाबाद का केंद्र बिंदु होने के अलावा उस समय की राजधानी था लाल किले को 17 वीं सदी के दौरान स्थापित किया गया था किले का निर्माण उस्ताद अहमद द्वारा 1639 में शुरू हुआ जो 1648 तक जारी रहा.

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हलाकि किले का अतिरिक्त काम 19 वी सदी के मध्य में शुरू किया गया था यह विशाल किला लाल पत्थर से बनाया गया है जो दुनियां के विशाल महलो में से एक है यह किला 2,41 किलोमीटर में फैला हुआ है इस किले में दो मुख्य गेट है जिन को लाहौर गेट और दिल्ली गेट कहा जाता है जिसे उस्ताद अहमद के शाही परिवार के लिए बनाया गया था।

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( 2 ) ताज महल : ताज महल जिस की गिनती दुनियां के सात आजुबो में होती है और पूरी दुनियां इसको मोहब्बत की निशानी के नाम से जानती है ताज महल का निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ ने अपनी पत्नी मुमताज़ की याद में बन बाया था ताजमहल के अन्दर बादशाह शाहजहाँ और मुमताज़ का मकबरा है जोकि ताजमहल का मुख्य आकषण है.

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ताजमहल का निर्माण कार्य 1632 में शुरू हुआ था जोकि 21 साल तक चला जिस में हजारों कारीगरों ने काम किया था ताजमहल की कोपी भारत के (बुलंदशहर और औरंगाबाद) व दुबई में की गई लेकिन बनाया नहीं जा सका।

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( 3) क़ुतुब मीनार : दिल्ली के क़ुतुब परिसर में मौजूद यह सबसे प्रसिद्ध संरचना है यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर के रूप में यह देश की सबसे ऊंची मीनार है इस की ऊंचाई 72,5 मीटर है.

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क़ुतुब मीनार को 1193 से 1368 के बीच में क़ुतुब-अल-दीन ऐबक ने विजय स्तंभ के रूप में बन बया था यह भारत की एक देखने वाली संरचना है।

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( 4 ) चार मीनार : चार मीनार हैदराबाद की खास पहचान मानी जाती है इसको मोहम्मद क़ुतुब शाही ने 1591 में बनवाया था जिस के नाम से साफ जाहिर होता है की चार टावर यह भब्य ईमारत प्राचीन काल की वास्तुशिल्प का बेहतरीन नमूना है.

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इस टावर में चार चमक-धमक वाली मीनारे है जोकि चार मेहराब से जुडी हुई है मेहराब मीनार को सहारा भी देता है जब क़ुतुब शाही ने गोलकुंडा के स्थान को नई राजधानी बनाया था यह वाकई में आज भी काबिले तारीफ है।

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( 5 ) बड़ा इमाम बाड़ा : लखनऊ मे गोमती नदी के किनारे बना बड़ा इमाम बाड़ा नवाब आसफुद्दोला ने बनवाया था इस इमारत को बनाने मे लोहे का इस्तेमाल नहीं हुआ और न ही किसी खम्बे का यह 50 मीटर लंबा और 16 मीटर चौड़ा हॉल है इसे सिर्फ ईटो का बनाकर निर्माण किया है इसकी उचाई 15 मीटर है और लगभग 20,000 टन बजनी छत बिना किसी बीम के सहारे मजबूती से टिकी हुई है.

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इसको देखकर दुनिया के बड़े बड़े इंजीनियर भी सोचते रह जाते है आखिर ये कैसे संभव है इस इमारत को खाद्य पद्धार्तो से मिलकर बनाया गया है और इसकी दीवारे उडद की दाल चुने आदि का मिश्रण से तैयार किया गया है दुनिया के आर्किटेक्चर का बेहेतरीन नमूना है इस भूल भुलैय्या मे अकेले जाना मना है क्योंकि इसमें एक हज़ार से भी ज़्यादा छोटे छोटे रास्ते है जिसमे कुल दरवाज़ों संख्या 479 है.

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